
पटियाला (पंजाब)
पटियाला के किसानों का कहना है कि अनुबंध खेती न किसान और न ही देश के हित में है। देश की ज्यादातर आबादी खेतीबाड़ी पर निर्भर है। ऐसे में अगर किसान ही बर्बाद हो गया तो फिर देश की अर्थव्यवस्था भी गर्त में चली जाएगी। किसानों ने एक सुर में कहा कि अनुबंध खेती के तहत किसानों को उनकी फसल का कॉरपोरेट घराने मनमर्जी के दाम देंगे। रुपयों की जरूरत पड़ी तो किसान पैसे लेने कहां जाएगा। फिलहाल आढ़ती जरूरत के अनुसार रुपये उपलब्ध करवाते हैं।
‘विकसित देशों में सिस्टम फेल हो गया तो भारत में क्यों लागू किया जा रहा है ‘
इंडियन फॉर्मर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान सतनाम सिंह बहिरू ने कहा कि अनुबंध खेती के तहत अगर कंपनी के साथ किसान का कोई विवाद हो जाता है तो वह कोर्ट में भी नहीं जा सकेगा। इससे मोदी सरकार की नीयत साफ है कि वह किसानों को अपने मित्र कॉरपोरेट घरानों का गुलाम बनाना चाहती है। अनुबंध खेती किसानों के लिए मौत का वारंट है, जो किसी कीमत पर लागू नहीं होना चाहिए। जब अमेरिका जैसे बड़े व विकसित देशों में यह सिस्टम फेल हो गया तो फिर इसे भारत में क्यों लागू किया जा रहा है।
‘फसलों के मनमर्जी दाम देंगे कॉरपोरेट घराने’
नाभा के गांव राइमल माजरी से किसान गुरदीप सिंह ने कहा कि किसान के घर कोई शादी व अन्य खुशी का मौका हो, या फिर बच्चों की शिक्षा संबंधी खर्च हो। हर बार वह आढ़ती के पास जाकर पैसा ले लेता है। लेकिन अनुबंध खेती होने पर किसान पैसे की जरूरत पड़ने पर कहां जाएगा। ऊपर से फसलों के मनमर्जी दाम दिए जाएंगे। यह काला कानून है, इसलिए किसानों का यह आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है।
‘जमीनों पर धीरे-धीरे कब्जा कर लेंगे’
वहीं कौरजीवाला के किसान अवतार सिंह का कहना है कि अनुबंध खेती तो बहाना है, इस कानून के जरिये कॉरपोरेट घराने किसानों की जमीनों पर धीरे-धीरे कब्जा कर लेंगे। एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) खत्म कर दी जाएगी। अगर कंपनी के साथ किसान का कोई विवाद हुआ तो उसकी कहीं सुनवाई नहीं होगी। यह कानून नहीं, किसानों की बर्बादी है।
